उत्तराखंड के चारों धामों में वितरित होने वाले प्रसाद को अब पहले जाँच किया जायेगा 

बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के नाम पर प्रसाद अब बिना जांच के नहीं बेचा जा सकेगा। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चारधाम के नाम पर प्रसाद बनाने वालों के लिए पंजीकरण और जांच अनिवार्य कर दी है। प्राधिकरण की अध्यक्ष रीता तेवतिया ने बुधवार को यह निर्देश दिए।  खाद्य सुरक्षा विभाग की बैठक में तेवतिया ने कहा कि चारधाम के साथ ही उत्तराखंड के सभी प्रमुख मंदिरों में प्रसाद बनाने वाले और विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन कराकर उन्हें ट्रेनिंग दी जाए। प्रसाद की जांच भी कराएं ताकि श्रद्धालुओं को शुद्ध प्रसाद मिले।

चारधाम में अभी बिना पंजीकरण और जांच के ही प्रसाद बनाया और बांटा जा रहा है। कई संस्थाएं राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रसाद बेच रही हैं। इसे देखते हुए खाद्य संरक्षा आयुक्त ने प्रसाद की शुद्धता के लिए कड़े कदम उठाने को कहा है। प्राधिकरण अध्यक्ष ने अफसरों को निर्देश दिए कि सितंबर में चारधाम व सिद्धबली मंदिर में ट्रेनिंग वर्कशाप कराई जाए। बैठक में खाद्य सुरक्षा आयुक्त नितेश झा, अपर आयुक्त अरुणेंद्र चौहान, स्टेट नोडल अफसर राजेंद्र रावत, गणेश कंडवाल, रमेश सिंह, रचना लाल आदि अधिकारी मौजूद थे।

सरकार का शुद्धता पर ध्यान देना बेहतर : जोशी
चारधाम में 15 संस्थाएं प्रसाद बनाने का काम कर रही हैं व सैकड़ों लोग प्रसाद बेचने का काम कर रहे हैं। हैस्को के संस्थापक डॉ.अनिल जोशी ने बताया कि चारधाम में प्रसाद बनाने का काम महिला स्वयं सहायता संस्थाओं को देने के पीछे हैस्को का महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का आइडिया था। इसमें खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन होता है। यह अच्छा है कि सरकार प्रसाद की शुद्धता पर ध्यान देने जा रही है।

कर्मचारियों की सुविधाएं बढ़ाए सरकार : तेवतिया 
भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण अध्यक्ष रीता तेवतिया ने बुधवार को बैठक के दौरान अधिकारियों को खाद्य सुरक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही विभाग में सुविधाओं की कमी को भी दूर करने को कहा गया है। हाल में उत्तराखंड सरकार की ओर से विभाग की समस्याओं को दूर करने के लिए एफडीए का गठन किया गया है। अब इसे मजबूत करने को कहा गया है।

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