लाइसेंस सिर्फ ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए मान्य होंगे।

जब व्यापारी पटाखों की दुकान के लाइसेंस के लिए व्यापारी खुद कदम थामे हुए थे, तब प्रशासन ने अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी आवेदन जमा करने का विकल्प दे दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि शहरभर में 700 लाइसेंस जारी कर दिए गए। लाइसेंस लेकर व्यापारियों ने दुकान में माल भरा ही था कि प्रशासन ने एक आदेश और जारी कर उनकी मुश्किल बढ़ा दी। आदेश के मुताबिक लाइसेंस सिर्फ ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए मान्य होंगे।

एनजीटी के नौ नवंबर के आदेश में मध्यम श्रेणी के वायु प्रदूषण वाले शहरों में ग्रीन पटाखे जलाने की शर्त के साथ दो घंटे पटाखे जलाने की अनुमति दी है। इस आदेश के क्रम में बुधवार को मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने भी आदेश जारी कर सिर्फ ग्रीन पटाखों की बिक्री करने की बात कही है। प्रशासन ने भी आदेश का अनुसरण करते हुए ग्रीन पटाखों का फरमान जारी कर दिया। हालांकि, ग्रीन पटाखे होते क्या हैं, इसका पता न तो व्यापरियों को है, न ही खरीदारों को। दूसरी तरफ जब पटाखों की खरीद की जा चुकी है और दुकानों में माल भी आ चुका है। ऐसे में अब ग्रीन पटाखों की उपलब्धता और बिक्री को लेकर किसी के पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

पिछली दफा सिर्फ 450 लाइसेंस जारी किए गए थे:
पिछली दीपावली पर प्रशासन ने पटाखों की बिक्री के लिए 450 लाइसेंस जारी किए थे। इस दफा लाइसेंस के लिए पहले अंतिम तिथि पांच नवंबर रखी गई थी। अंतिम तिथि तक महज 200 आवेदन की आए थे। सुरक्षित दीपावली के लिहाज से पटाखों के प्रति घटी व्यापारियों की दिलचस्पी उम्मीद जगाने वाली थी। हालांकि, प्रशासन ने फिर व्यवस्था बनाई कि 11 नवंबर को लाइसेंस जारी होने तक आवेदन किए जा सकेंगे। यही वजह है कि लाइसेंस का आंकड़ा 700 पर जा पहुंचा।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी नहीं जानता ग्रीन पटाखे क्या हैं:
शासन व प्रशासन के आदेश में जिन ग्रीन पटाखों का जिक्र किया गया है, उससे स्वयं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी अनभिज्ञ है। बोर्ड के नोडल अधिकारी अंकुर कंसल का कहना है कि ग्रीन पटाखों की प्रकृति स्पष्ट न होने के चलते वह दीपावली पर सिर्फ प्रदूषण मापने का काम करेंगे। 30 फीसद तक कम प्रदूषण फैलाते हैं ग्रीन पटाखे ग्रीन पटाखे दून के बाजार से दूर हैं।

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