कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की आहट ने अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

दिल्ली एवं एनसीआर क्षेत्र के बाद उत्तराखंड और हरिद्वार जिले में भी संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगी है। अभिभावक बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर हैं, इसका अंदाजा सरकारी और निजी स्कूलों में छात्र एवं छात्राओं की कम होती उपस्थिति से लगाया जा सकता है। इसी महीने दो नवंबर से हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों की कक्षाओं का संचालन शुरू हुआ है, लेकिन एक सप्ताह से छात्र एवं छात्राओं की उपस्थिति कम होने लगी है। कई स्कूलों में उपस्थिति मात्र दस फीसदी रह गई है। 

1- डीपीएस रानीपुर (28 फीसदी)
डीपीएस रानीपुर छात्र संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा निजी स्कूल है। यहां कक्षा दसवीं में 200 और कक्षा 12वीं में 150 बच्चे पंजीकृत हैं। बृहस्पतिवार को स्कूल में कक्षा 10वीं के 45 फीसदी और कक्षा 12वीं के मात्र सात फीसदी विद्यार्थियों की उपस्थिति थी। कक्षाओं में प्रवेश से पहले मुख्य द्वार पर बच्चे हैंड सैनिटाइजर कर अंदर प्रवेश कर रहे थे। स्कूल में शारीरिक दूरी से कक्षाओं में सीटें लगाई गई थी। कक्षाओं में जितने भी शिक्षक और बच्चे थे वे मास्क पहने बैठे थे। पूछे जाने पर स्कूल प्रधानाचार्य डॉ. अनुपम जग्गा ने बताया कि दोबारा से कोरोना के केस बढ़ने से अभिभावक चिंतित हैं। इसलिए बच्चों की संख्या घटने लगी है।

2- आदर्श बाल सदन कॉलेज बहादरपुर जट (46 फीसदी)
स्कूल में कक्षा 10वीं में चार सौ विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बृहस्पतिवार को इनमें से दो सौ छात्र-छात्राएं ही उपस्थित रहे। कक्षा 12वीं में भी पंजीकृत 160 बच्चों में से 70 छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचे थे। दो दिन से छात्र एवं छात्राओं की उपस्थिति में लगातार कमी आ रही है। स्कूल के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर रखा हुआ था। शारीरिक दूरी के साथ स्कूल स्टाफ काम कर रहा था। कुछ छात्रों ने मास्क पहना था तो कुछ ने कपड़े या रुमाल से मुंह ढका हुआ था। पूछे जाने पर प्रधानाचार्य धर्मेंद्र चौहान ने बताया कि कोरोना को देखते हुए अभिभावकों की चिंताएं बढ़ी हैं, लेकिन स्कूल में सरकार के सभी मानकों का पूरा पालन किया जा रहा है।

3- मां सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बहादराबाद (10 फीसदी)
स्कूल में कक्षा 10वीं में 116 विद्यार्थी और कक्षा 12वीं में 186 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बृहस्पतिवार को स्कूल रजिस्टर में हाईस्कूल में 21 और इंटरमीडिएट में मात्र 11 विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। स्कूल में देखने से लग रहा था कि कोरोना के नियमों का पालन किया जा रहा है। एक दो बच्चे जरूर बिना शारीरिक दूरी का पालन किए साथ चल रहे थे। टीचर के टोकने पर बच्चे अलग अलग होकर चलने लगे। पूछने पर स्कूल प्रधानाचार्य प्रवीण कुमार ने बताया कि नवंबर पहले सप्ताह के बाद से हाईस्कूल में 22 फीसदी और 12वीं में 19 फीसदी तक बच्चों की उपस्थिति बढ़ गई थी, लेकिन तीन दिन की उपस्थिति गिरने लगी है।

4- राजा बाबू पब्लिक इंटर कॉलेज, धनौरी (41 फीसदी)
यहां पर हाईस्कूल में 120 बच्चे और इंटर में 161 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बृहस्पतिवार को हाईस्कूल के 51 और इंटर के मात्र 66 विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे। स्कूल की कक्षाओं में सीटें तो पहले की तरह ही लगी थी, हालांकि बैठने की व्यवस्था शारीरिक दूरी के नियमों को ध्यान में रखते हुए की गई थी। बच्चाें को जागरूक करने के लिए ‘मास्क है जरूरी’ लिखे स्लोगन भी लगे हुए थे। नोटिस बोर्ड पर भी सभी जानकारी अंकित की गई थी। स्कूल प्रधानाचार्य अंजना सैनी ने बताया कि कोरोना की डर और शादियों का सीजन होने से बच्चों की उपस्थिति कम हो रही है। स्कूल में बच्चों की स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन की सभी व्यवस्थाएं की गई है।

5- पन्ना लाल भल्ला इंटर कॉलेज, हरिद्वार (32 फीसदी)
कॉलेज में हाईस्कूल में 66 और इंटर में 118 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। बृहस्पतिवार को हाईस्कूल में 25 और इंटर में 35 विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे थे। स्कूल प्रांगण में कुछेक बच्चे बैठे बातें कर रहे थे। हालांकि शारीरिक दूरी के नियमों का पालन हो स्कूल स्टाफ इसपर लगातार नजर बनाए रखे हुए था। स्कूल में प्रवेश करने वाले बच्चों और अन्य स्टाफ को हाथ सैनिटाइजर करने के लिए टोका जा रहा था। पूछने पर स्कूल प्रधानाचार्य ओपी गोनियाल ने बताया कि सहालग और कोरोना की डर से छात्र संख्या कम हुई है। जो बच्चे शादी में शामिल होने के बाद लौट रहे हैं उन्हें तीन दिन की छुट्टी दी जा रही है ताकि संक्रमण का रिस्क न हो सके।

कोविड 19 हम सभी की जिंदगी में ऐसा समय लेकर आया है, जिसके लिए हम तैयार नहीं थे, लेकिन यह संकट भी बीत जाएगा। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों और बच्चों को परीक्षाओं की चिंताएं लाजमी है। हालांकि यह वक्त सकारात्मक सोच के साथ कोरोना को हराने का है। सरकार के मानकों का पालन करके ही इससे बचा जा सकता है। दीर्घकालिक लक्ष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान में खुश रहें। पौष्टिक भोजन और व्यायाम के साथ अच्छी नींद लें।
– डॉ. ऋचा आर्य, मनोविज्ञानी शिक्षक, डीपीएस स्कूल

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