देवभूमि का दिव्य वेडिंग डेस्टिनेशन बना त्रियुगीनारायण, जनवरी से अब तक इतनी शादियां हुई संपन्न
त्रियुगीनारायण में जनवरी से अब तक करीब 100 शादियां संपन्न हुई. त्रियुगीनारायण मंदिर देशभर के नवयुगलों की बन रहा पहली पसंद.
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड की पावन केदारघाटी में स्थित पौराणिक एवं विश्वप्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर आज केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देशभर के नवयुगलों के लिए सबसे चर्चित और आध्यात्मिक “वेडिंग डेस्टिनेशन” बन चुका है. मान्यता है कि इसी दिव्य स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था तथा स्वयं भगवान विष्णु इस अलौकिक विवाह के साक्षी बने थे. यही कारण है कि अब देश के कोने-कोने से नवयुगल इस पवित्र धाम में सात फेरे लेने पहुंच रहे हैं.
समुद्रतल से ऊंचाई पर बसे इस दिव्य स्थल में वर्षभर श्रद्धालुओं और नवविवाहित जोड़ों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा, हिमालय की मनमोहक वादियां, पौराणिक महत्व और अखंड जलती दिव्य अग्नि नवयुगलों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है. यही वजह है कि त्रियुगीनारायण मंदिर अब आधुनिक “डेस्टिनेशन वेडिंग” की चमक-दमक को पीछे छोड़कर आध्यात्मिक विवाह स्थल के रूप में नई पहचान बना रहा है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती ने इसी स्थल पर विवाह रचाया था. विवाह के दौरान प्रज्ज्वलित हुई पवित्र अग्नि आज भी मंदिर परिसर में अखंड रूप से जल रही है, जिसे “धनंजय अग्नि” कहा जाता है. नवयुगल इसी अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं और वैवाहिक जीवन की शुरुआत करते हैं. माना जाता है कि इस पवित्र अग्नि के समक्ष विवाह करने वाले दंपत्तियों को भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा उनका वैवाहिक जीवन सुख, समृद्धि और प्रेम से परिपूर्ण रहता है.
त्रियुगीनारायण मंदिर अब देशभर के नवयुगलों की पहली पसंद बन चुका है. यहां केवल विवाह ही नहीं, बल्कि शादी की सालगिरह मनाने के लिए भी बड़ी संख्या में दंपति पहुंच रहे हैं. इस पवित्र धाम में विवाह करने से नवयुगलों को भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
राजेश भट्ट, सदस्य, तीर्थपुरोहित समिति
पूरे देश से पहुंच रहे नवयुगलत्रियुगीनारायण मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है. दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से नवयुगल यहां विवाह करने पहुंच रहे हैं. सोशल मीडिया और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते प्रभाव के चलते यह स्थल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चाओं में बना हुआ है. जानकारी के अनुसार साल 2026 की शुरुआत से अब तक यहां करीब 100 शादियां सम्पन्न हो चुकी हैं, जबकि बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद से ही लगभग 40 नवयुगल विवाह बंधन में बंध चुके हैं. आगामी शुभ मुहूर्तों के लिए भी बड़ी संख्या में बुकिंग और पूछताछ जारी है.
बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के बीच स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है. मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन कुंड, अखंड अग्नि और शांत वातावरण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं. यही कारण है कि यह स्थल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धार्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है. उत्तराखंड पर्यटन और धार्मिक आस्था के केंद्रों में त्रियुगीनारायण मंदिर तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है. जिस पावन भूमि पर स्वयं महादेव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था, उसी भूमि पर आज हजारों नवयुगल अपने नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं.


