वर्ष 2018 में हाई कोर्ट के आदेश पर शुरू किए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान का यह तीसरा चरण था।

इस दफा भी हाई कोर्ट के हड़काने पर अधिकारी अतिक्रमण हटाने को तैयार हुए। हालांकि, इस दफा भी अभियान पर कमजोर इच्छाशक्ति हावी रही। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम पहले ही दिन प्रेमनगर से बैरंग लौट गई थी और जो दो दिन का समय अतिक्रमणकारियों को दिया गया था, उसकी मियाद छोड़ी गई तकनीकी अड़चनों के चलते अब तक पूरी नहीं हो पाई है।

अतिक्रमण हटाने के लिए बनाई गई टास्क फोर्स को इस दफा 1379 अतिक्रमण ध्वस्त करने थे, जबकि हटाए जा सके 1131 अतिक्रमण। विरोध के बाद व्यापारियों को अतिक्रमण हटाने के लिए जो समय दिया गया था, उसमें कई व्यापारी कोर्ट चले गए। कुछ को स्टे मिल गया और कुछ पर कोर्ट ने सरकार को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने को कहा। लिहाजा, अधिकारियों को भी जिम्मेदारी से बचने का बहाना मिल गया। अफसर तो विधिक राय लेने के बहाने मामले को टालने के मूड में थे, मगर एक बार फिर हाई कोर्ट ने उनकी तंद्रा तोड़ दी। अब कोर्ट में 17 नवंबर तक संबंधित अधिकारियों को एफिडेविट फाइल करने हैं। देखना यह है कि जिम्मेदार अब तक की कार्रवाई के मुताबिक ही जवाब दाखिल करते हैं या इस बीच दोबारा से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है।

तीसरे चरण में यह रही कार्रवाई:
पहला दिन : चकराता रोड, हरिद्वार रोड, राजपुर रोड व सहारनपुर से लगे कुछ इलाकों में 216 अतिक्रमण तोड़े गए। प्रेमनगर से टीम एक भी अतिक्रमण तोड़े बिना लौट गई थी।
दूसरा दिन : पलटन बाजार में 176 अतिक्रमण तोड़े गए। शेष अतिक्रमण व्यापारियों को स्वयं ध्वस्त करने का समय दिया गया।
तीसरा दिन : कर्जन रोड, डीएल रोड, कौलागढ़ और पलटन बाजार क्षेत्र में 424 अतिक्रमण तोड़े गए। इनमें पलटन बाजार क्षेत्र में व्यापारियों की ओर से स्वयं तोड़े गए 202 अतिक्रमण भी शामिल हैं।
चौथा दिन : पलटन बाजार में व्यापारियों की ओर से स्वयं तोड़े गए अतिक्रमण समेत कुल 262 अतिक्रमण ध्वस्त किए गए।

विराम के बाद फिर कार्रवाई:
अलग-अलग तिथि में प्रशासन की टीम ने दिलाराम बाजार में 14 अतिक्रमण ध्वस्त किए और शहरभर में धार्मिक प्रतिष्ठानों के 34 अतिक्रमण हटाए गए।

एमडीडीए का सीलिंग अभियान भी थमा:
हाई कोर्ट के आदेश के क्रम में एमडीडीए ने भी अवैध निर्माण पर कार्रवाई करते हुए सीलिंग अभियान शुरू किया था। हालांकि, 67 प्रतिष्ठान सील करने के बाद अभियान को रोकना पड़ा। क्योंकि, एमडीडीए ने कुछ ऐसे प्रतिष्ठानों को भी सील कर दिया था या सील करने की तैयारी थी, जिन्होंने पूर्व में निर्माण को वैध करा लिया था। लिहाजा, जांच के नाम पर अभियान स्थगित हो गया।

बोले अधिकारी:
-विनय शंकर पांडे (नगर आयुक्त एवं टास्क फोर्स के अध्यक्ष) का कहना है कि अब तक अतिक्रमण हटाने की जो कार्रवाई की गई है, उसकी रिपोर्ट नोडल अधिकारी सचिव लोनिवि को सौंप दी गई है। त्यागी रोड व प्रेमनगर में कुछ व्यापारियों को स्टे मिला है। यहां के मामले में विधिक राय भी ली गई है। कोर्ट और शासन स्तर से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उनका अनुपालन कराया जाएगा।

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