471 आउटसोर्स कार्मिकों को सीएम तीरथ सिंह रावत ने दी बड़ी राहत।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पंचायतीराज विभाग में आउटसोर्सिंग से तैनात 95 कनिष्ठ अभियंताओं एवं 376 डाटा एंट्री आपरेटर को बड़ी राहत दी है। उनकी तैनाती अवधि एक साल के लिए बढ़ाई जाएगी। उक्त कार्मिकों को नियोजित करने के संबंध में प्रस्ताव अगली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का जिले व राज्य स्तर पर समाधान करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने गुरुवार को अपने आवास से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पंचायतीराज विभाग की समीक्षा की। उन्होंने विभाग के माध्यम से कराए जाने वाले कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। विभाग के कार्यों में जल जीवन मिशन को भी जोडऩे के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि उक्त मिशन के तहत स्वीकृत कार्यों एवं 15वें वित्त आयोग के टाइड फंड के अंतर्गत कार्ययोजना को जोड़ा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत भवनों के पुनर्निर्माण की आवश्यकता से संबंधित प्रस्ताव शासन को प्राथमिकता के साथ भेजे जाएं। राज्य में 7791 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 6610 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन निर्मित हैं। 1181 पंचायतें भवन विहीन हैं। 1157 पंचायतों के भवन जीर्ण शीर्ण हैं। इस प्रकार कुल 2338 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन निर्माण की आवश्यकता है। केंद्रीय पंचायतीराज मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत 2019-20 में 100 ग्राम पंचायतों में भवन निर्माण को 20 लाख प्रति पंचायत की दर से धनराशि दी।
150 ग्राम पंचायतों में चार लाख प्रति पंचायत की दर से भवन मरम्मत और 150 ग्राम पंचायतों में चार लाख प्रति भवन की दर से कामन सर्विस सेंटर संचालन को अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार ने पंचायत भवनों के निर्माण को केंद्रीय वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग और मनरेगा में वित्तीय प्रविधान किया है। राज्य में पंचायतों की न्यून जनसंख्या व विषम क्षेत्रफल के दृष्टिगत केंद्र से मिलने वाली धनराशि अपर्याप्त है। लिहाजा राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में पंचायत भवन के लिए 20 करोड़ का प्रविधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने त्रिस्तरीय पंचायतों में विकास योजनाओं और गतिविधियों को लाभार्थी परक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के 12 जिलों में जिला योजना समिति के चुनाव और त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव में रिक्त रह गए पदों पर दोबारा निर्वाचन कराने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि हरिद्वार जिले में समय पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने चाहिए। पंचायतीराज सचिव व निदेशक हरिचंद्र सेमवाल ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। बैठक में पंचायतीराज मंत्री अरविंद पांडेय, वित्त सचिव अमित नेगी व सौजन्या भी मौजूद थे।

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