छात्रों के प्रदर्शन का श्रेय लेने की कोशिश: पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी के धरने पर बोली बीजेपी
बीजेपी सांसद नरेश बंसल ने कहा कि ये प्रदर्शन अब छात्रों का नहीं रहा. पार्टियां अपने हित साध रही हैं. अनामिका रत्ना की रिपोर्ट.
नई दिल्ली: सोमवार को जहां छात्र सड़क पर नजर आये और दिल्ली के लुटियंस जोन में आवागमन लगभग ठप रहा, वहीं मंगलवार का दिन अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के धरना प्रदर्शन का रहा. अभी तक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना प्रदर्शन से थोड़ी दूरी बरत रही कांग्रेस भी छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री आवास पर धरना दिया.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के तमाम नेता मार्च करते हुए पीएम आवास पहुंचे. वहीं एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों का हाल जाना. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अरविंद केजरीवाल समेत विपक्षी पार्टियों के तमाम नेता दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर सोमवार के प्रदर्शन में घायल हुए छात्रों का हाल जाना. हालांकि मंगलवार को ही सबसे पहले स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा RML अस्पताल पहुंचकर वहां भर्ती घायलों का हाल जाना और डॉक्टरों से भी बात की.
संसद में सोमवार की तरह ही मंगलवार को भी विपक्षी पार्टियों ने सरकार से नीट पेपर लीक और राम मंदिर दान में हुई चोरी को लेकर बहस की मांग की, जिसकी वजह से दोनों सदनों में हंगामा हुआ. इस वजह से संसद की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी.

ये मुद्दा हाई वोल्टेज ड्रामा की जगह तब ले लिया जब अचानक शाम 4 बजे के आसपास राहुल गांधी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मार्च करते हुए प्रधानमंत्री आवास पहुंचकर धरने पर बैठ गए. राहुल ने पीएम मोदी से जवाब की मांग की और कहा कि प्रधानमंत्री जवाब दिए बगैर नहीं निकल सकते हैं. छात्रों पर हमला हर परिवार पर हमला और छात्रों की आवाज दबाई नहीं जा सकती है. यहां तक कि राहुल गांधी ने ये भी अपील कर दी कि हर भारतीय उनके धरने में शामिल हों.
इस दौरान सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह उनके पास गए और राहुल और तमाम नेताओं से बात की और अपील की कि वो अपना धरना प्रधानमंत्री आवास से खत्म कर दें और बातचीत से हल निकालें. लेकिन प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं ने उनकी बात नहीं मानी. वहां से लौटकर जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और दोबारा कांग्रेस नेताओं को मनाने पहुंचे.
बहरहाल ये मामला अब छात्रों के हित से ज्यादा राजनीतिक पार्टियों के बीच सियासत का होता जा रहा है. उधर एनसीपी (SP) नेता शरद पवार और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग पर विरोध जताया और छात्रों से मुलाकात की.
राजनीतिक पार्टियां अपने हित साध रहीं
इस मुद्दे पर भाजपा सांसद नरेश बंसल ने ईटीवी भारत की वरिष्ठ संवाददाता अनामिका रत्ना से बात करते हुए कहा कि ये प्रदर्शन अब छात्रों का नहीं रहा और इसे राजनीतिक पार्टियां अपने हित साधने के लिए प्रयोग कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि जैसे ही पेपर लीक हुआ वैसे ही सरकार ने इसपर जांच गठित की और कुछ ही दिनों में फुलप्रूफ तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, ताकि छात्रों का भविष्य बर्बाद ना हो. उन्होंने कहा कि पेपर लीक करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर 13 लोगों को जेल भी भेजा गया और आज पीएम मोदी ने उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की भी बात कही. मगर अलग-अलग पार्टियां अब अलग-अलग तरीके से इसका श्रेय लेने और इसपर राजनीति करने में जुट गईं हैं.
उन्होंने कहा कि मानसून सत्र है और बहुत सारे महत्वपूर्ण बिल पास होने हैं. सरकार बार-बार विपक्ष से गुजारिश कर रही है कि वो सदन में आएं और विधायी कार्याें अपना सहयोग करें मगर विपक्षी पार्टियां मात्र हंगामा करना चाहती हैं, और इस मुद्दे पर सियासत करना चाहती हैं.
क्या इस सत्र में विधायी कार्य बगैर विपक्ष के ही होंगे? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार के विधायी कार्य तो होने हैं और सरकार उनसे आग्रह करेगी और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में सभी बिल पर समय भी निर्धारित कर दिए गए हैं. इसके बाद बावजूद यदि विपक्ष साथ नहीं देता है तो सरकार को तो विधायी कार्य करने हैं.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की बात नहीं मानेगी सरकार!
इस सवाल पर कि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा है, क्या सरकार उनकी मांग मानेगी. इसपर बोलते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि सरकार ने इस लीक को लेकर हरसंभव आवश्यक करवाई की है और मुझे नहीं लगता है कि इस्तीफे की बात मानी जाएगी.
