ये है दुबई में उत्तराखंड के बजरंगी भाई जान 500 से ज्यादा फसे हुये लोगो को भेज चुके है उनके वतन 

ये है दुबई में उत्तराखंड के बजरंगी भाई जान 500 से ज्यादा फसे हुये लोगो को भेज चुके है उनके वतन  
पिछले दिनों टीवी के बड़े पर्दे पर आई सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान को आपने देखा होगा फिल्म में दिखाए गए सलमान खान के किरदार को भी आपने देखा और पूरी फिल्म की कहानी एक पाकिस्तानी बच्ची की है जो गलती से हिन्दुस्तान में आ गयी थी और यंहा उसका कोई नहीं था उस पाकिस्तानी बच्ची यानी मुन्नी को सलमान खान से तमाम परेशानियां झेलते हुए सकुशल वापस उसके घर पकिस्तान तक  पहुंचाया था यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी हिट हुई लेकिन   वो थी एक फ़िल्मी की कहानी मगर रियल लाइफ में भी एक ऐसा ही बजरंजी भाई जान जैसा किरदार है जो दुबई में फंसे हुए लोगो को वापस उनके देश भेजने में मदद करता है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के एक छोटे से गांव का रहने वाला गिरीश पंत भी इस बजरंगी भाईजान फिल्म की तरह ही दुबई,शारजाह, और   कतर जैसे देशों से अब तक लगभग 500 लोगों को उनके घर भिजवा चुका है वो केवल हिदुस्तान के लोगो को ही नहीं बल्कि पकिस्तान और श्रीलंका जैसे और भी कई देशो के लोगो की मदद कर उन्हें उनके वतन वापस भिजवा चूका है
 
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले गिरीश पंत पिछले 10 सालों से दुबई में रहकर काम कर रहे है गिरीश वंहा केवल अपने लिए रोजी रोटी ही नहीं कमाते है बल्कि वो हिदुस्तान, पकिस्तान, श्रीलंका से दुबई और अन्य अरब देशों में रोजी रोटी की तलाश में गए उन लोगो के लिए किसी भगवान् से कम नहीं है जो वंहा जाकर धोखाधड़ी का शिकार होकर फंस जाते है और अपने वतन आने के लिए तरस जाते है यानी वंहा कैदियों से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर उन लोगो के लिए गिरीश पंत एक मसीहा बन चुके है गिरीश वंहा फंसे ऐसे लॉगो की मदद कर उन्हें हर तरह की सहायता देकर वापस उनके वतन पंहुचाने में मदद  कर रहे  है गिरीश अब तक 500 से ज्यादा वंहा पर फंस चुके लोगो को वापस उनके वतन भिजवा चुके है
 
जब हम किसी मुसीबत में फस जाते है तो उस वक्त किसी का सहारा भी हमे बेहद सुखद लगता है इतना ही नहीं सहारा देने वाला इंसान हमें भगवान दिखने लगता है ऐसे ही सैकड़ों लोगों के लिए भगवान बने हैं उत्तराखंड के गिरीश पंत गिरीश इस वक्त दुबई की एक निजी कंपनी में काम करते है पिछले 10 सालों से वह दुबई में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं घर में पत्नी और बच्चे हैं माता-पिता और भाई दिल्ली में रहते हैं दरअसल गिरीश पंत को लोगो की मदद करने का जूनून है जो उन्हें विरासत में मिला है गिरीश के दादा स्वतंत्रता सेनानी थे उनके पिता खुद एक समाजसेवी है दादा और अपने पिता से उन्होंने बचपन से ही लोगो की मदद करना सीखा है और वो जब भारत में भी रहते थे तब भी यंहा पर मुसीबत में लोगो की मदद करते थे 10 साल पहले वो काम के सिलसिले में दुबई चले गए मगर वंहा पर भी लोगो की मदद करने का जज्बा उनके दिल में हिलोरें मार रहा था मगर वंहा के क़ानून के हालत को समझने बिना ये संम्भव नहीं था गिरीश को वंहा का कानून और हलालों को समझने में 4 साल लग गए और जब उन्होंने वंहा पर लोगो की मदत करना शुरू किया तो फिर ना रुके और अब तक 500 से ज्यादा फंस चुके लोगो को वंहा से निकाल कर वापस उनके देश भेज चुके है
 
बात लगभग 6 साल पुरानी है जब पहली बार दुबई में रहते हुए गिरीश पंत के पास भारत के ही रहने वाले एक व्यक्ति का कॉल आई जिसने अपनी समस्या कुछ इस तरह बताई कि उसका पासपोर्ट कंपनी ने जप्त कर लिया है और उसे भारत वापस जाने नहीं दे रहे हैं इतना ही नहीं गिरीश को बताया गया कि उसकी तनख्वाह और बाकी पैसे भी कंपनी उसे नहीं दे रही है भारत सरकार से परिवार ने गुहार लगाई लेकिन उस वक्त कुछ नहीं हो पाया लिहाजा पन्त ने अपनी तरफ से तमाम प्रयास किये और लंबे प्रयास के बाद गिरीश उस व्यक्ति को भारत भेजने में कामयाब हो गए धीरे धीरे गिरीश पंत के पास एक के बाद एक कई लोगों की समस्याएं आने लगी और गिरीश सबकी मदद करते चले गए आज आलम यह है कि दुबई सहित दूसरे अरब देशों में अगर कोई व्यक्ति किसी कंपनी के शोषण का शिकार होता है तो वह सबसे पहले गिरीश पंत से संपर्क करने की कोशिश करता है गिरीश पंत बताते हैं कि कई बार उनके सामने इस तरह के केस आते हैं कि वंहा नौकरी के लिए गए लोगों को ना केवल मारा पीटा जाता है बल्कि उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार भी किया जाता है और उन्हें जैसे ही इस बात की खबर लगती है वह फौरन लोगों की मदद करने के लिए पहुंच जाते हैं  

रियल बजरंगी भाईजान गिरीश पंत बताते हैं कि इस काम को करने में उन्हें कई बार तकलीफ का सामना भी करना पड़ता है हर देश के अलग कानून है ऐसे में वहां के कानूनों का ख्याल भी रखना पड़ता है अब दुबई सहित अरब देशो में फसे ऐसे मामलों में अब उनके पास ही फ़ोन आते है वंहा पर भारतीय दूतावास और विदेश विभाग भी गिरीश की ऐसे मामलों में पूरी मदद करता है गिरीश के पास कई बार दुबई से 200 या 250 किलोमीटर दूर से फोन आते हैं और फोन करने वाले कई बार यह कहते हैं कि उनको खाने तक के लिए नहीं दिया जा रहा है फंसे हुए लोगों को वह दुबई के प्रशासन और भारत की एम्बेसी से संपर्क करके किसी तरह से वहां से निकालते हैं

 
ऐसा नही है कि गिरीश किसी बड़े घराने से है गिरीश के पिता ने परिवार का लालन पालन सब्जी बेच कर किया है और भारत से बाहर जाने का कभी सपने में भी नही सोचा था लेकिन आज वो ना केवल दुबई में है बल्कि लोगो की सहायता भी कर रहे है उनके इस समाज सेवा के काम के चलते कई बार उनकी नोकरी भी खतरे में पड़ गयी है जब वो आफिस के समय मे भी लोगो के एक फ़ोन से ही चले जाते है गिरीश ने उत्तराखंड में आई 2013 कि आपदा में भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया था और कई पहाड़ के लोगो को तुरंत भेजने का भी इंतजाम करवाया था और खुद भी कुमाऊ ओर गढ़वाल में लोगो की सहायता के लिए पहुचे थे गिरीश की खासियत ये है कि वो जब लोगो को मुसीबत से निकालते है तो ना वो ये देखते है कि फसे हुये लोग हिन्दू है या मुस्लिम वो तो बस सालो से यू ही अपने काम के साथ लोगो का दिल जीत रहे है

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