24 घंटे के भीतर सात संक्रमित मरीजों की मौत हुई है।

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 75 हजार पार पहुंच गया है। बीते 24 घंटे के भीतर सात संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। वहीं, 473 नए संक्रमित मरीज मिले हैं। इसी दौरान 538 मरीजों को डिस्चार्ज भी किया गया। एक सप्ताह बाद ऐसा हुआ है कि एक दिन में मिले संक्रमितों से ज्यादा ठीक होने वाले मरीजों की संख्या रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को 11701 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं, देहरादून जिले में 164, पिथौरागढ़ में 51, चमोली में 43, हरिद्वार में 40, अल्मोड़ा में 32, पौड़ी में 26, टिहरी में 25, ऊधमसिंह व नैनीताल में 24-24, उत्तरकाशी में 16, बागेश्वर में 14, चंपावत में 10, रुद्रप्रयाग जिले में चार संक्रमित मिले हैं।
वहीं, सेना अस्पताल पिथौरागढ़ में दो, एचएनबी बेस हॉस्पिटल श्रीनगर में एक, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में दो, दून मेडिकल कॉलेज में एक, श्री महंत इन्दिरेश हॉस्पिटल में एक मरीज ने दम तोड़ा है। अब तक 1238 संक्रमित मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि 68365 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

रुड़की में स्वास्थ्य विभाग ने की जांच और पुलिस ने किए चालान:
बिना मास्क के बाजार में घूमने वाले लोगों का स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस की मदद से जबरन कोरोना सैंपल लिए और जांच के लिए भेज दिए। टीम ने सैंपल देने वाले लोगों के नाम, पता और मोबाइल नंबर भी नोट किया। इस बीच पुलिस ने बिना हेलमेट और मास्क नहीं लगाने वालों के चालान भी काटे।

मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सीपीयू की मदद से बिना मास्क वाले लोगों के खिलाफ जमकर अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने रामपुर चुंगी पर बिना मास्क लगाकर घूमने वाले लोगों को रोक लिया।
साथ ही उनका जबरन सैंपल ले लिया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सैंपल देने वालों के नाम, पता और मोबाइल नंबर भी नोट किए ताकि रिपोर्ट के बारे में उन्हें जानकारी दी जा सके। इस दौरान सैंपल लेते देख मास्क नहीं लगाने वाले लोग इधर उधर भागते भी देखे गए। अरबन हेल्थ ऑफिसर रामकेश गुप्ता ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कोरोना जांच का दायरा और गति बढ़ा दी गई है।

इसलिए अब मास्क नहीं लगाने वालों के भी सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके अलावा व्यापारियों और उनकी दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों की जांच की गई। उन्होंने बताया कि सौ लोगों के सैंपल लिए गए हैं। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। वहीं अभियान के तहत सीपीयू ने भी मास्क नहीं पहनने वालों के चालान काटे। साथ ही उन्हें कोरोना के प्रति जागरूक भी किया।

वैक्सीन को लेकर बंटवाए भ्रामक पर्चे, मुकदमा दर्ज:
धर्मनगरी में वैक्सीन विरोधी पर्चे बंटवाने का मामला सामने आया है। पर्चों को लोगाें के घरों तक पहुंचाया गया है। पर्चे कहां छपे और किसने छापे हैं, इसका उसमें कोई जिक्र नहीं है। रानीपुर कोतवाली पुलिस ने इस मामले में सोमवार देर रात अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न बीमारियों की वैक्सीन को लेकर भ्रामक प्रचार कर आम जनता में भय बनाने और भड़काने का प्रयास करने का मुकदमा दर्जकर जांच शुरू कर दी है। 

रानीपुर कोतवाली निरीक्षक योगेश देव ने बताया कि ‘वैक्सीन विरोध क्यों’ के नाम से पर्चे छपवाकर कई जगह बंटवाए गए हैं। रंगीन पर्चे में विभिन्न बीमारियों के लिए जीवनदान साबित होने वाली वैक्सीन के बारे में गलत तथ्य और भ्रामक जानकारियां दी गई हैं। पर्चे में वैक्सीन से मिलने वाली इम्युनिटी को अप्राकृतिक बताने का अवैज्ञानिक और गलत दावा किया गया है।

इसके अलावा पर्चे में कई और भी गलत जानकारियां हैं। कोतवाली निरीक्षक ने बताया कि पर्चे लोगाें के घरों और कार्यालयों तक पहुंचे हैं। पर्चे में किसी संस्था, व्यक्ति का नाम और टेलीफोन नंबर नहीं लिखा गया है। प्रिंटिंग कहां हुई इसका उल्लेख भी नहीं है। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धारा 336 व 505 में मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमे में वैक्सीन को लेकर भ्रामक प्रचार फैलाकर मानव जीवन के लिए संकट उत्पन्न करने की धाराएं लगाई गई हैं। 

कोरोना की चपेट में आए साहित्यकार मंगलेश डबराल:
साहित्य अकादमी से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि मंगलेश डबराल कोरोना की चपेट में आ गए हैं। वह गाजियाबाद के सेक्टर चार स्थित अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने उनकी मदद को हाथ बढ़ाया है। साथ ही यूपी सरकार के माध्यम से उनकी निगरानी की कवायद की है।

वरिष्ठ साहित्यकार मंगलेश डबराल पिछले दिनों कोरोना पीड़ित हो गए। उन्हें बेटी अलमा डबराल ने गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। बेटी दिन रात अस्पताल के बाहर आर्थिक संकट से जूझते हुए पिता की देखभाल कर रही है। मामले की जानकारी होने पर सांसद अनिल बलूनी ने गाजियाबाद के जिलाधिकारी और अस्पताल के डॉक्टरों से बात की। उनको हर संभव मदद देने की मांग की है।

उन्होंने बताया कि यूपी सरकार के माध्यम से डॉक्टरों से रोजाना दो बार डबराल के स्वास्थ्य की जानकारी देने का आग्रह किया गया है। गौरतलब है कि सर्वश्रेष्ठ रचना ‘हम जो देखते हैं’ के लिए मंगलेश डबराल को वर्ष 2000 में साहित्य अकादमी ने पुरस्कृत किया था। मंगलेश की कविताओं के भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, रूसी, जर्मन, डच, स्पेनिश, पुर्तगाली, इतालवी, फ्रेंच, पोलिश और बुल्गारियाई भाषाओं में भी अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी किया मदद का आग्रह:
पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी मंगलेश डबराल के जल्द स्वस्थ होनेे की कामना कर लोगों से उनकी मदद करने का आग्रह किया है। रावत ने फेसबुक पेज पर जारी संदेश में कहा कि मंगलेश कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। उन्होंने डबराल की मदद के लिए लोगों से आग्रह किया।

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