भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट नए कृषि कानूनों के विरोध में आज मंगलवार को देहरादून रेलवे स्टेशन पर पंचायत करेगा।

बहादराबाद विकासखंड के गांव खेड़ा में हुई बैठक में किसानों ने यह निर्णय लिया। सोमवार को हुई बैठक में यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी संजीव तोमर ने कहा कि तीनों नए कृषि कानून किसान हित में नहीं हैं।

इन कानूनों से केवल उद्योगपतियों को लाभ होगा। किसानों को नुकसान के अलावा इनसे कुछ हासिल होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि लगभग कई दिनों से दिल्ली में काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। आंदोलन में कई किसान शहीद हो चुके हैं, लेकिन भाजपा सरकार अपने तानाशाही रवैये के चलते किसी भी तरीके से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

किसान भी तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे, जब तक कानून निरस्त नहीं किए जाते। उन्होंने बताया कि मंगलवार को संगठन काले कानून का विरोध प्रदर्शन कर देहरादून रेलवे स्टेशन पर पंचायत करेगा। इस दौरान उन्होंने अंकित को नारसन युवा ब्लाक अध्यक्ष नियुक्त किया। बैठक में इसम सिंह, पवन त्यागी, अजय त्यागी, अंकित गुर्जर, परमजीत, आदित्य, विपुल, कपिल, हरीश, अशोक चौधरी, भूषण, मोनू आदि मौजूद रहे। 

किसानों का संघर्ष जल्द रंग लाएगा : प्रीतम
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार को हरिद्वार के बहादराबाद में ट्रैक्टर रैली निकालकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि किसानों का संघर्ष जल्दी ही रंग लाएगा और केंद्र सरकार को काले कानूनों को वापस लेना होगा।

पूर्व विधायक अंबरीष कुमार के संयोजन में किसान रैली की पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थी। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान ट्रैक्टरों के साथ बहादराबाद पहुंचे। यहां से कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने नेतृत्व में रैली एनएच 58 से शुरू होकर बहादराबाद सिडकुल होकर विकास भवन रोशनाबाद में समाप्त हुई। 

यहां पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन काले कानूनों को पास कर किसानों के हितों पर कुठाराघात किया है। कड़ाके की ठंड में किसान और उनके परिवार दिल्ली बॉर्डर पर अपने हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने किसानों से ऋण माफ करने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टा किसानों पर ही काला कानून थोप दिया गया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार में ऋणों को माफ कर किसानों के हित में ऐतिहासिक कार्य हुए। 

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