उत्तराखंड बना अन्य राज्यों के लिए मिसाल..

आयुष्मान योजना में फ्रॉड रोकने और अस्पतालों को क्लेम भुगतान करने में उत्तराखंड देश में पहले स्थान पर है। योजना को बेहतर ढंग से संचालित करने में उत्तराखंड अन्य राज्यों के लिए मिसाल बना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने 25 सितंबर को फ्रॉड रोकने और क्लेम भुगतान की रणनीति पर उत्तराखंड की विशेष प्रस्तुतीकरण रखा जिसे अन्य राज्यों के साथ साझा किया जाएगा। 

23 सितंबर को आयुष्मान योजना को दो साल पूरे हो रहे हैं। योजना में गोल्डन कार्ड धारक मरीजों के इलाज में धोखाधड़ी करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की है। फ्रॉड करने वाले अस्पतालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही रिकवरी की है।
वहीं, निजी अस्पतालों को सात दिन से कम समय में क्लेम का भुगतान किया जा रहा है। एनएचए ने फ्रॉड रोकने और क्लेम भुगतान में उत्तराखंड को देश का पहला राज्य घोषित किया है। वहीं, प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को आयुष्मान योजना में पांच लाख तक इलाज की सुविधा देने में भी उत्तराखंड देश का पहला राज्य है। 
39 लाख लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बने:
आयुष्मान योजना में प्रदेश में अब तक 39 लाख लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बने हैं। 99 प्रतिशत लाभार्थियों के कार्ड आधार कार्ड से लिंक है। दो साल में प्रदेश के 2.6 लाख से अधिक मरीजों के इलाज पर सरकार ने 192  करोड़ की राशि व्यय की है।

सबसे ज्यादा डायलिसिस के 1.10 लाख मरीजों को योजना लाभ मिला है। इसके अलावा सर्जरी, कैंसर, हृदय रोग, हड्डी रोग समेत अन्य गंभीर बीमारियों का भी योजना में इलाज किया गया है। 

प्रदेश में आयुष्मान योजना को बेहतर ढंग से संचालित किया जा रहा है। जो कमियां है, उनमें सुधार करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि पात्र लाभार्थियों को योजना में बेहतर इलाज की सुविधा मिले। इसके लिए अस्पतालों को समय पर क्लेम का भुगतान और फ्रॉड मामलों की गहन निगरानी की जा रही है।
– डीके कोटिया, अध्यक्ष, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण

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