आज ही के दिन 2017 में उत्तराखंड में एक नई पटकथा लिखी गयी थी ,यह अब तक की सबसे बुरी हार थी,

आज ही के दिन 2017 में उत्तराखंड से हमारी सरकार गयी,यह अब तक की सबसे बुरी हार थीजिस भावना से सोनिया गांधी जी व राहुल गांधी जी ने हरीश रावत जी और किशोर उपाध्याय की टीम बनायी थी,हम बुरी तरह से असफल रहे और उस भावना का सम्मान नहीं कर पाये।
हरीश रावत जी को जब कांग्रेस ने मुख्य मंत्री नियुक्त किया तो 2013 की भयानक त्रासदी से टूटे उत्तराखंड में एक नयी आशा और उजास का संचार हुआ। लोक सभा की हार ने हौसले को तोड़ा, लेकिन जिस तरह राजस्थान और मध्य प्रदेश के उप चुनाओं ने कांग्रेस को संजीवनी दी। उप-चुनावों में उत्तराखंड की कांग्रेस टीम ने नरेन्द्र मोदीजी के अश्वमेध के बेलगाम घोड़े पर लगाम लगायी।
इसी टीम ने पंचायत चुनावों में भाजपा को करारी शिकस्त दी और नरेंद्र मोदीजी और भाजपा के ग़ुब्बारे की हव्वा फुस कर दी।
कांग्रेस की लोकप्रियता और टीम भावना को देख कर नरेन्द्र मोदीजी को जब लगा कि भाजपा उत्तराखंड के मतदाताओ का आशीर्वाद हासिल नहीं कर पायेगी और 2017 का विधान सभा चुनाव नहीं जीत पाएगी तो उन्होंने लोभ-लालच देकर कांग्रेस के 9 विधायकों को तोड़कर दल-बदल का कलंक देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति पर हमेशा के लिए लगा दिया।
कांग्रेस टीम ने इस बार भी अभूतपूर्वक काम किया “लोकतन्त्र बचाओ” आंदोलन के तहत पहले पूरे प्रदेश का कांग्रेस जन और उसके बाद उत्तराखंड राज्य आंदोलन की तरह लोक तंत्र बचाओ आंदोलन में उत्तराखंड की जनता उमड़ पड़ी।
जहाँ-जहाँ भी मैं, हरीश रावतजी और हमारे वरिष्ठ नेता जाते लोगों का हुजूम स्वतः उमड़ पड़ता।जन-सैलाब को देखकर कांग्रेस के कुच्छ विधायक जो ढुल-मुल मानसिकता के थे, उनके पैर ठिठक गये।सोमेश्वर विधायक ज़रूर लालच से अपने से नहीं रोक पायी।
अन्तत:, संविधान के अनुसार बहुमत का फ़ैसला विधान सभा में हुआ और कांग्रेस ने सरकार बचाने के साथ-साथ भाजपा को पूरे देश में कठघरे में खड़ा कर दिया। पूरे देश में भाजपा की थू-थू हुई।
लोगों को लगा, हरीश रावत और किशोर की जोड़ी हिट है और आगे और बड़े चमत्कार करेगी।इस जोड़ी ने 2002 में भी चमत्कार किया था।
लेकिन, जोड़ी हिट विकेट हो गयी।
जो आशायें, केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश के कांग्रेसजनों और उत्तराखंड की जनता ने हम से की थीं, 2017 में धूल-धूसरित हो गयीं।
इसके ज़िम्मेदार हम हैं और उत्तराखंड के कांग्रेस जनों के अपराधी हैं।
मैंने, जब 9 विधायक कांग्रेस छोड़ कर गये और जब हम विधान सभा चुनाव हारे, दोनों बार श्री राहुल गांधीजी से इस्तीफ़े की पेशकश की।
मैं, उनका आभारी हूँ, उन्होंने इस पेशकश को ठुकराया।
आज, पूरे एक वर्ष की अंतर्वेदना को झेलते हुए अपने उन सभी वरिष्ठ नेताओ से निवेदन करना चाहता हूँ कि आओ, उत्तराखंड के उन निर्दोष कांग्रेसजनों से अपनी नालायकी के लिए क्षमा माँगे और वह भी उनके पास जाकर।
कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधीजी ने भी आज महाधिवेशन में भी यही संदेश दिया है कि अगर आपसे कोई भूल होती है तो क्षमा माँगकर आप उसका मोचन करें।
जिस दिन हम यह काम कर गये उसी दिन कांग्रेस खड़ी हो जाएगी और अपने अतीत के गौरव को भी पुन: प्राप्त कर लेगी।

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