अजय भट्ट जी, नसीहत देने से पहले अपने गिरेबां में झांकिए ..!

अजय भट्ट जी, नसीहत देने से पहले अपने गिरेबां में झांकिए ..!

आज के दैनिक जागरण अखबार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का एक बयान छपा है. बयान में अजय भट्ट आंदोलनकारियों को न केवल संयम बरतने की नसीहत दे रहे बल्कि धमकाने वाले अंदाज में सवाल भी उठा रहे हैं कि, आज आंदोलन करने वाले लोग पिछले सत्रह वर्षों से कहां थे. अजय भट्ट का यह भी कहना है कि प्रदेश सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की तरफ बढ़ रही है.

हमारे पास अजय भट्ट के लिए कुछ सवाल हैं.

पहला सवाल ये कि, आखिर किस हैसियत से अजय भट्ट ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कर रहे हैं? प्रचंड मोदी लहर के बावजूद विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने वाले अजय भट्ट की सरकार में कौन सी संवैधानिक पदवी है?

दूसरा सवाल ये कि, चुनाव से पहले तक गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की बात कहने वाले अजय भट्ट को अब ग्रीष्मकालीन राजधानी का राग अलापने पर शर्म नहीं आती ? इस तरह का बयान देने के बाद क्या अजय भट्ट अपने गिरेबां में झांकेंगे ?

तीसरा सवाल ये कि, आंदोलनकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाने वाले अजय भट्ट को क्या ये नहीं मालूम कि, राज्य गठन की तारीख के दिन से ही आंदोलनकारी ताकतें गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग को लेकर संघर्षरत हैं? क्या अजय भट्ट नहीं जानते कि बाबा मोहन उत्तराखंडी कौन थे ?

अजय भट्ट जी आपकी इस बेशर्मी की हम कड़ी निंदा करते हैं, और आपको खुली बहस की चुनौती देते हैं.

बजटसत्र के पहले दिन आंदोलनकारियों ने दिवालीखाल बैरियर पर जब आपकी गाड़ी रोकी तो आप डर के मारे बाहर ही नहीं निकले. गैरसैंण के लिए आपके मन में रत्ती भर भी लगाव होता तो आप आंदोलनकारियों से वार्ता करते न कि मुंह छुपाते.

हम जानते हैं कि आपकी पार्टी और विपक्षी कांग्रेस दोनो ही गैरसैंण के साथ छल कर रहे हैं, और हम इस छल को बेपर्दा करके रहेंगे.

इस लिए आंदोलनकारियों को नसीहत देने से पहले अपने गिरेबां में झांकिए. आंदोलनकारियों को आपकी नसीहत की जरूरत नहीं है. सरकार नहीं देगी तो जनता छीन कर लेगी…

‘लड़ेंगे और जीतेंगे’
‘जय गैरसैंण, जय उत्तराखंड’
✊✊✊ प्रदीप सती वाल सेे

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