उत्तराखंड विधानसभा 2017 में देहरादून जिले की 10 सीटों पर मजबूत दावेदार

उत्तराखंड विधानसभा 2017 में देहरादून जिले की 10 सीटों पर मजबूत दावेदार

 

चकराता विधानसभा

 

2017 के विधानसभा चुनाव में तीन बार के चकराता से विधायक प्रीतम सिंह एक बार फिर से मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. इसबार फिरसे प्रतीम सिंह चकराता विधानसभा से जितकर आने की पूरी संभावना है.

वही दूसरे नंबर पर बीजेपी के मधु चौहान रहने वाली है. मधु चौहान बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी हैं.

 

राज्य बनने के बाद चकराता से तीनों विधानसभा चुनाव में प्रीतम सिंह जितकर विधानसभा पहुंच चुके हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

विकासनगर विधानसभा

 

विकासनगर विधानसभा से एकबार फिरसे नवप्रभात की जितकर वापसी की पूरी उम्मीद है, 2002 और 2012 की विधानसभा चुनाव में नवप्रभात विकासनगर से जितकर विधायक बने थे वही इसबार फिरसे उम्मीद है की वह जितकर वापसी कर सकते हैं.

वही बीजेपी ने अपने मुख्यप्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान पर दांव खेला है, मुन्ना सिंह चौहान 2007 में बीजेपी के टिकट से चकराता विधानसभा से विधायक रह चुके हैं. और इसबार मुन्ना सिंह चौहान का दूसरे नंबर पर रहना तय माना जा रहा है.

 

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2002 अभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसनव प्रभात87,38660.60%58[3]2007भारतीय जनता पार्टीमुन्ना सिंह चौहान113,67063.80%5156[4]2012भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसनव प्रभात93,52472.40%9857[2]

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सहसपुर विधानसभा

सहसपुर विधानसभा को एक हॉट विधानसभा सीट माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्य़ाय पहली बार सहसपुर से अपनी किस्मत आंजमा रहे हैं. वही कांटों भरी डगर में कांग्रेस प्रदेश और बीजेपी के सहदेव पुंडीर के बीच में मजबूत टक्कर मानी जा रही है. वही जब हम 2002 से 2012 तक के तीन विधानसभा चुनाव पर नजर डालते हैं तो दिखता है की सहसपुर की जनता ने किसी भी विधायक को दूबारा मौका नही दिया है. वही इस विधानसभा में कांग्रेस और बीजेपी दोनो के ही बागी खेल को और दिलचस्प बना रहे हैं. जहां कांग्रेस के बागी आयेंद्र शर्मा कांग्रेस के मुस्लिम वोट काटते नजर आ रहे हैं तो वही बीजेपी की बागी लक्ष्मी अग्रवाल बीजेपी के वोट तो काट ही रही है साथ साथ कांग्रेस के मुस्लिम वोटों पर भी उनकी पकट मानी जा रही है.

जिसकी वजह से सहसपुर विधानसभा को एक दिलचस्प विधानसभा के रुप में सभी देख रहे हैं. वही इसबार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहसपुर से जितकर विधानसभा पहुंच सकते हैं.

वजह कई हैं.

पहली मुस्लिम वोट बैंक का होना जो की कांग्रेस को सीधे सीधे फायदा देगा, दूसरा बागियों की संख्या जो की पुंडिर का वोट ज्यादा काटेंगे.

 

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2002 अभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेससाधू राम72,94359.90%51962002 अ2007भारतीय जनता पार्टीराजकुमार112,87660.90%4900[2]2012भारतीय जनता पार्टीसहदेव सिंह पुण्डीर111,90074.50%5490

 

 

 

 

 

 

 

धर्मपुर विधानसभा

 

धर्मपुर विधानसभ में भी एक बडी जंग देखने को मिल सकती है, यहां से कांग्रेस से तीन बार के विधायक दिनेश अग्रवाल और देहरादून मेयर विनोद चमोली के बीच में सिधी टक्कर है. विनोद चमोली जिन्हे की पहाड़ी चेहरा माना जा रहा है. तो दिनेश अग्रवाल का अपना वोट बैंक हैं. जिस वजह से इन दोनो के बिच मे बड़ी टक्कर मानी जा रही है. वही यह बताना मुश्किल है की कौन जितकर आ सकता है लेकिन पहाड़ी वोटर और एन नए चहरे की चाह विनोद चमोली को फैवरेट बना रही है तो वोट मैनेजमेंट के मामले में दिनेश अग्रवाल आगे नजर आ रहे हैं. लेकिन आखरी बाजी विनोद चमोली मार सकते हैं.

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2012भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसदिनेश अग्रवाल120,99862.10%9,420

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

रायपुर विधानसभा

 

रायपुर विधानसभा से 2012 के विधानसभा चुनाव मे सिर्फ 474 वोटों से जितने वाले उमेश शर्मा काऊ की स्थिती इसबार भी मजबूत मानी जा रही है. लेकिन उमेश के सामने भी कई परेशानी खड़ी है.. क्योंकि काऊ कांग्रेस के बागी है तो  जो कांग्रेस कैडेट के वोट है वह तो अब उमेश को मिलने वाले नही है वही बीजेपी का दामन थामने वाले काऊ के लिए बीजेपी के वोट भी तुष्टीकरण के साथ मिल सकते हैं. लेकिन कांग्रेस द्वारा प्रभुलाल बहुगुणा को उतारना हरीश रावत की एक सोची समझी रणनीति हो सकती है. क्योंकि बेदाग बहुगुणा पहाड़ी चेहरा भी है. और लोगों के बीच में उनकी अच्छी पकड़ भी बताई जाती है. वही काऊ के लिए सबसे ज्यादा परेशानी निर्दलिय रजनी रावत खड़ी कर रही है. उमेश शर्मा काऊ का मजबूत गढ़ माने जाने वाला मलीन बस्तियों के इलाके में रजनी रावत ने सेंध मार दी है. जिसका सिधा फायदा प्रभुलाल बहुगुणा को मिल सकता है. वही प्रभुलाल बहुगुणा को कमजोर समझने का नुकशान उमेश शर्मा काऊ को उठाना पड़ सकता है. यहां पर भी दोनों को 50 50 नबंर दिया जाना चाहिए क्योंकि कोई भी सीट निकाल सकता है.

 

 

 

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2012भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसउमेश शर्मा ‘काऊ’120,00863.80%474

 

 

 

राजपुर रोड़ विधानसभा

राजपुर रोड़ से इसबार भी कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार का जितना तय माना जा रहा है. बीजेपी द्वारा खजान दास को टिकट दिया जो की राजपुर रोड़ विधानसभा में कमजोर प्रत्याशी माने जा रह हैं… वही राजकुमार की पकड़ आम आदमी तक मानी जाती है. लेकिन 2002 के विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस प्रत्याशी हीरा सिंह विष्ट जीते थे तो वही 2007 में बीजेपी के गणेश जोशी और 2012 में कांग्रेस के राजकुमार जिससे यह तो साफ नजर आता है की राजपुर रोड़ की जनता दोबारा मौके देने में कम ही विश्वास रखती है. लेकिन इसबार राजकुमार का जितना तय इस लिए भी माना जा रहा  है क्योंकि बीजेपी का कमजोर प्रत्याशी को उतारना तो निर्दलिय के रुप में भी कोई मजबूत कैंडिडेट नही होना.

 

 

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2012भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसराजकुमार98,98860.80%3,070[2]

 

कैंट विधानसभा

पिछले तीनों विधानसभा में बीजेपी के टिकट पर जितकर आने वाले हरबंस कपुर प्रदेश ही नही बल्की बीजेपी के केंद्र तक अपनी अच्छी पकड़ रखते हैं. जहां पिछली तीन विधानसभा चुनावों में वह हर बार बड़े अंतर से जितकर आए वही इसबार भी बीजेपी ने उन्ही पर दाव खेला है. लेकिन हरीश रावत ने सोच समझकर इसबार हरबंस कपुर के सामने उतारा है सुर्यकांत धस्माना, सुर्यकांत धस्माना कैंट सीट से पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. लेकिन हरीश रावत का सुर्यकांत को टिकट देना बेकार नजर नही आ रहा है. वही जब हम हरबंस कपुर की बात करते हैं तो इसबार वह लगातार चौथी बार बीजेपी के टिकट पर लड़ रहे हैं लेकिन उनके सामने इसबार चुनौती बड़ी है. जहां बीजेपी के कई बड़े नाम जो की राज्यस्तर पर अपनी पकड़ रखते हैं वह कैंट विधानसभा से टिकट मांग रहे थे लेकिन टिकट ना मिलने के बाद उन्होने भले ही खुलकर अपना विरोध दर्ज नही किया लेकिन उन्होने हरबंस कपुर का साथ भी नही दिया ना वो किसी रैली में उनके साथ दिखे ना ही  बैनर पोस्टरों में. जिसका नुकसान हरबंस कपुर को उठाना पड़ सकता है. वही कांग्रेस ने सूर्यकांत धस्माना को टिकट दिया है धस्माना को मजबूत कैंडिडेट माना जा रहा है. और बीजेपी के अंदर के विरोध का फायदा धस्माना को मिल सकता है. जिससे धस्माना का जितना हरबंस के ज्यादा माना जा रहा है.

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2012भारतीय जनता पार्टीहरबंस कपूर102,40261.20%5,095[2]

 

 

 

 

 

 

 

 

मसूरी विधानसभा

 

मसूरी विधानसभा एक ऐसी विधानसभा है जिसमें गोरखा समुदाय का वोटबैंक ज्यादा है. हां पहाड़ी वोटबैंक भी है लेकिन ज्यादा गोरखा वोटबैंक का ही निर्णायक रहता है.वही मौजूदा विधायक गणेश जोशी का गोरखा समुदाय के बीच में अच्छी पकड़ बताई जाती है. लेकिन हरीश रावत ने इसबार बहुच सोच समझकर दांव खेला, और गोदावरी थापली को टिकट दिया. क्योंकि गोदावरी थापली खुद गोऱखा समुदाय से आती है. जिसकी वजह से गोरखा वोट बैंक का बंटना लगभग तय है. जिसके बाद पहाड़ी वोटबैंक अब निर्णायक बन चुका है. लेकिन जब हम गणेश जोशी की तरफ नजर डालते हैं तो वह गढ़वाल और कुमांउ वाद का शिकार हो सकते हैं क्योंकि गणेश जोशी खुद कुमांउ से हैं. जिससे गढ़वाली वोट बंट सकता है. और इसका सिधा फायदा कांग्रेस और गोदावरी थापली को मिल सकता है.

 

 

 

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2002 अभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसजोत सिंह गुनसोला63,12043.60%6343[3]2007भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसजोत सिंह गुनसोला66,99156.50%1138[4]2012भारतीय जनता पार्टीगणेश जोशी102,70261.40%9776[2]

 

 

 

 

डोईवाला विधानसभा

2012 के विधानसभा चुनाव में रमेश पोखरियाल निशंक इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट 2014 में हुए उपचुनाव में विजयी रहे।

डोईवाली विधानसभा में मौजूदा विधायक हीरा सिंह विष्ट की स्थिती मजबूत मानी जा रही है. भले ही बीजेपी ने अपने बड़े नेता त्रिवेंद्र रावत को टिकट दिया है लेकिन फिर भी स्थिती हीरा सिंह की साफ दिख रही है.

 

 

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2002 अभारतीय जनता पार्टीत्रिवेन्द्र सिंह रावत129,28946.50%1536[3]2007भारतीय जनता पार्टीत्रिवेन्द्र सिंह रावत171,16956.00%14127[4]2012भारतीय जनता पार्टीरमेश पोखरियाल निशंक107,01571.40%1272[2]2014 (उपचुनाव)भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसहीरा सिंह बिष्ट3000

 

 

ऋषिकेश विधानसभा

 

ऋषिकेश विधानसभा से बीजेपी ने जहां अपने दो बार के विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल पर ही दाव खेला तो कांग्रसे ने एकबार फिरसे राजपाल खरोला को टिकट दिया है. भले ही राजपाल खरोला का आम आदमी के बीच में मजबूत पकड़ नही मानी जाती है. और खुद कांग्रेस नेता भी राजपाल को पंसद नही करते हैं लेकिन फिर भी राजपाल को इसबार फायदा मिल सकता है. इसकी वजह है खुद बीजेपी बीजेपी ने अपने मौजूदा विधायक पर ही दांव खेला जबकी बीजेपी के लिए संदीप गुप्ता मजबूद माने जा रहे थे जिसकी बाद संदीप गुप्ता को टिकट नही मिला और वह मैदान में निर्दलिय ही उतर गए जिसका सिधा फायदा कांग्रेस को तो नुकसान बीजेपी को होता दिख रहा है. संदिप गुप्ता की लोगों के बीच में अच्छी छवी है. और बीजेपी के वोट वो जरुर काटेंगे. जिसका सिधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा. वही कांग्रेस में कोई बगावत देखने को नही मिला. नगर निगम मेयर दीप शर्मा जो की ऋषिकेश में अपनी अच्छी पकड़ रखते हैं उन्होने भी राजपाल के लिए वोट मांगा जिसका सिधा फायदा राजपाल को मिल रहा है जिससे कांग्रेस की सीट आती नजर आ रही है.

 

वर्षपार्टीविधायकपंजीकृत मतदातामतदान %बढ़त से जीतस्रोत2002 अभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसशूरवीर सिंह सजवाण117,42050.20%841[3]2007भारतीय जनता पार्टीप्रेमचन्द अग्रवाल148,88957.90%9077[4]2012भारतीय जनता पार्टीप्रेमचन्द अग्रवाल119,64667.80%7271

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